Thursday, August 30, 2018

प्रेस रिव्यू: सुप्रीम कोर्ट ने चेताया, 'तो फट जाएगा लोकतंत्र का प्रेशर कुकर'

इंडियन एक्सप्रेस
दैनिक भास्कर
मोदी ने नमो ऐप के ज़रिए वाराणसी के भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर कई बार लोग मर्यादाएं भूल जाते हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे में देश के हर एक नागरिक का कर्तव्य है कि वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल गंदगी फैलाने के लिए न करे.
में ख़बर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोगों से सोशल मीडिया पर गंदगी न फैलाने की अपील की.
अख़बार के मुताबिक भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में देशभर में छापे मारकर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने वाली महाराष्ट्र पुलिस को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से 'असहमति' जताने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जबकि 'असहमति तो लोकतंत्र के लिए सेफ्टी वॉल्व है.'
बेंच में शामिल जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'इससे असहमति प्रभावित होती है. असहमति जताना लोकतंत्र के लिए 'सेफ़्टी वॉल्व' है. अगर आप इस सेफ़्टी वॉल्व को नहीं रहने देंगे तो प्रेशर कुकर फट जाएगा.'
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, महाराष्ट्र पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अरेस्ट करने वाली स्पेशल सेल को नोटिस जारी किए. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई करेगा.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक मॉब लिंचिंग पर केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में बनी समिति ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी.
ये रिपोर्ट गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह को दी गई है और अब मंत्री-समूह अंतिम निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सिफ़ारिशें भेजेगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई झूठी सूचनाओं के कारण भीड़ की हिंसा को बढ़ावा मिला.
दरअसल, रिपोर्ट में उन घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया गया है जिनमें पिछले एक साल में 40 लोग भीड़ की हिंसा के शिकार हो गए थे.
हिंदुस्तान अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक आम लोगों के विकास पर खर्च होने वाले क़रीब 12 हज़ार करोड़ रुपये सांसदों की सुस्ती के चक्कर में या तो ख़र्च नहीं हो रहे या फिर अटके पड़े हैं.
सांसद निधि पर दिल्ली में 30 अगस्त को प्रस्तावित समीक्षा बैठक में इस धनराशि को खर्च करने और इसके इस्तेमाल पर नज़र रखे जाने वाले कामकाज पर चर्चा होगी.
लोकसभा और राज्यसभा के सांसद अपनी निधि के क़रीब पांच हजार करोड़ रुपये ख़र्च ही नहीं कर पाए हैं. इसलिए क़रीब सात हज़ार करोड़ की अगली किस्त जारी नहीं हुई.
धनराशि ख़र्च न कर पाने वालों में लगभग सभी राज्यों के सांसद शामिल हैं.ने सुरक्षा एजेंसी के सूत्रों के हवाले से छापा है कि कश्मीर में इस वक्त क़रीब 270 चरमपंथी सक्रिय हैं, लेकिन उन सभी के पास हथियार नहीं हैं.
इसलिए आतंकी सुरक्षाबलों से हथियार छीनने की फ़िराक में रहते हैं साथ ही हथियारों के लिए भी पुलिसकर्मियों पर हमला करते हैं.
सुरक्षा एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक चरमपंथी पहले बॉर्डर पार कर जाते थे और आतंक की ट्रेनिंग लेकर जब लौटते थे तो अपने साथ हथियार भी लेकर आते थे.
लेकिन जब से ऐंटी इनफ़िल्ट्रेशन ऑब्स्टिकल सिस्टम (एआईओएस) बना है तब से घुसपैठ मुश्किल हुई है और जो लोग नए रिक्रूट होते हैं उनके लिए हथियार लाना चुनौती बन गई है.
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Sunday, August 26, 2018

COP21之后:如何助力巴黎协议?

195个国家在去年底巴黎COP21会议上签署一项新的国际气候协议时,全球为之欢欣雀跃。该协议是一个关键的转折点,是世界走向零碳和气候适应的基本支点。但要延续巴黎峰会的势头、保证协议快速生效并得到充分执行,我们仍需采取一些关键的步骤。

本文中,我们就各国为保证巴黎协议执行而必须采取的重要措施有关问题进行回答:

1)各国在COP21峰会上达成了巴黎协议,是否意味着协议已经生效?

并非如此,各国仍需采取相应的措施,协议才会生效。
2015年12月12日在COP21峰会上,联合国气候变化框架公约( )各缔约国只是“通过”了巴黎协议。如此一来,协议的形式和内容得到了正式的确立。

除了通过巴黎协议之外,各缔约国就协议生效的必要条件做出数项关键决定。各方就各国如何敲定其国家气候方案以及如何将国家自主贡献预案( )变为国家确定贡献( )达成了一致。

2)现在该做什么?

广义上讲,各国现在必须加入巴黎协议并成为缔约国。要做到这一点,每个国家都应该签署条约并明确表示他们同意受到协议约束。
只有至少55个 缔约国签署巴黎协议并表明愿意接受协议约束,且签约国的温室气体排放量总和在全球温室气体排放总量中所占比重达到55%以上时,协议才能“发生效力”,即生效并具有法律约束力。协议正式生效后,将举行巴黎协议缔约国首次会议。在这次重要的会议上将通过许多保证协议有效所必需的详细规则和流程。

3)各国批准协议的时间表如何?

所有国家元首均可在2016年4月22日纽约举行的一场高级别签约仪式上签署协议。在接下来直至2017年4月21日的一年时间里,协议将开放签字。考虑到巴黎协议的重要性以及COP21峰会创造出的政治势头,专业人士预计许多国家都将派代表参加此次高层签约仪式。

虽然在协议上签字表明签约国承诺不会做出可能危害协议目标达成的行动,但签字本身并不意味着一国已经成为了巴黎协议的“缔约方”。如同许多其他国际协议一样,加入巴黎协议是一个两步走的过程:各国必须签署协议,然后还要表明其愿意加入协议并作为协议缔约方受到协议的约束。
4)各国如何表明他们同意接受协议约束并愿意成为缔约方?

大多数国家将“依照批准、接受或核准”程序签署协议,这意味着他们的签字必须以获得加入协议必须的国内许可为先决条件。某些国家还需要制定有关的国家性法律才能执行协议。例如,澳大利亚仅要求正式向议会告知并介绍协议,而墨西哥则必须首先获得参议院的同意。在美国,所有国际协议都基于总统的权力以“行政协议”方式加入。

一国完成必要的国内流程之后,将递交“批准、接受或者核准”文书。这表明该国已完成全部必要手续并可以正式加入协议。提交上述文件没有任何时间限制,一国可以按照自己的意愿,在签约后立即提交相关文书,也可以在签约同一天提交批准、接受或者核准文书,亦可以在签约很久之后提交。

5)缔约国如果在2017年4月22日之前没有签署协议,之后能否加入?
是的。在一年的签字期之后,协议将对有意“加入”的各方开放。所谓“加入”指的是一国成为其他国家已经签订的国际协议的缔约方。在2017年4月22日之后递交加入文书与此前在协议上签字并递交批准、接受或者核准文书虽然不同,但法律效力相同

6)巴黎协议何时正式生效?

只有当至少55个UNFCCC缔约国递交批准、接受或者核准文书,且上述缔约国温室气体排放量占世界总量的比重达到55%或以上时,巴黎协议才正式产生法律效力。目前还无法准确预测巴黎协议生效的确切时间,因为这取决于各国能在多长时间内完成国内审批流程。协议生效后,召开首次COP会议将同时将召开第一届巴黎协议缔约国会议。


下图显示了达成55%门槛的各种可能的组合方式。虽然根据各国向UNFCCC报送的最新排放数据存在一系列组合的可能性,我们的分析显示,要达成55%的门槛,中国、美国、欧盟、俄罗斯四个主要排放国中至少有一方要接受协议。上述国家正式成为协议缔约方的时间取决于各自国内法律体系。 采取必要的行动确保巴黎协议正式生效是延续COP21会议势头的必要一步。如果各国可以迅速采取行动,巴黎协议下的重要条款和要求将保证被付诸实践。

Monday, August 13, 2018

जब कास्त्रो ने इंदिरा गांधी को छाती से लगा लिया

बात 1960 की है. मौका था संयुक्त राष्ट्र संघ की पंद्रहवी वर्षगांठ का. दुनिया भर के चोटी के नेता न्यूयॉर्क में जमा हुए थे. जब फ़िदेल कास्त्रो न्यूयार्क पहुंचे तो ये जान कर उन्हें बहुत बड़ा धक्का लगा कि वहाँ का कोई होटल उन्हें अपने यहाँ रखने के लिए तैयार नहीं है.
एक दिन तो वो क्यूबा के दूतावास में रहे लेकिन अगले दिन उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव डैग हैमरशोल्ड से मुलाक़ात कर कहा कि ये आप की ज़िम्मेदारी है कि मेरे और मेरे प्रतिनिधिमंडल के रहने का इंतज़ाम करें वर्ना मैं संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के प्रांगण में तंबू डाल कर वहाँ रहने लगूंगा. ग़नीमत ये रही कि अगले दिन न्यूयार्क का टेरेसा होटल उन्हें अपने यहाँ रखने के लिए तैयार हो गया.
भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने बीबीसी के बताया कि जब मैं कास्त्रो से मिला तो उन्होंने मुझसे कहा, "क्या आप को पता है कि जब मैं न्यूयॉर्क के उस होटल में रुका तो सबसे पहले मुझसे मिलने कौन आया? महान जवाहरलाल नेहरू. मेरी उम्र उस समय 34 साल थी. अंतरराष्ट्रीय राजनीति का कोई तजुर्बा नहीं था मेरे पास. नेहरू ने मेरा हौसला बढ़ाया जिसकी वजह से मुझमें ग़ज़ब का आत्मविश्वास जगा. मैं ताउम्र नेहरू के उस एहसान को नहीं भूल सकता."
नेहरू और फ़िडेल की उस मुलाक़ात के बाद भारत के लिए उनकेन में जो सम्मान और स्नेह पैदा हुआ उसमें कभी कमी नहीं आई. 1983 में जब भारत में गुटनिरपेक्ष सम्मेलन हुआ तो फ़िदेल कास्त्रो यहाँ आए. सम्मेलन की शुरुआत में ही फ़लस्तीनी नेता यासर अराफ़ात इस बात पर नाराज़ हो गए कि उनसे पहले जॉर्डन के शाह को भाषण देने का मौक़ा दिया गया. भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह उस सम्मेलन के सेक्रेट्री जनरल थे.
नटवर कहते हैं, "उस सम्मेलन में सुबह के सत्र में फ़िदेल कास्त्रो अध्यक्ष थे. उसके बाद इंदिरा गांधी अध्यक्ष बन गईं थीं. सुबह के सत्र के बाद मेरे डिप्टी सत्ती लांबा मेरे पास दौड़े हुए आए और बोले बहुत बड़ी आफ़त आ गई है. यासेर अराफ़ात बहुत नाराज़ हैं और तुरंत ही अपने विमान से वापस जाना चाहते हैं. मैंने इंदिरा जी को फ़ोन किया और कहा कि आप फ़ौरन विज्ञान भवन आ जाइए और अपने साथ फ़िदेल कास्त्रो को भी लेते आइए."
नटवर आगे बताते हैं, "कास्त्रो साहब आए और उन्होंने फ़ोन कर यासर अराफ़ात को भी बुला लिया. उन्होंने अराफ़ात से पूछा आप इंदिरा गाँधी को अपना दोस्त मानते हैं कि नहीं. अराफ़ात ने कहा, दोस्त नहीं... वो मेरी बड़ी बहन हैं. इस पर कास्त्रो ने तपाक से कहा तो फिर छोटे भाई की तरह बरताव करो और सम्मेलन में भाग लो." अराफ़ात इंदिरा गांधी और फ़िदेल को मना नहीं कर पाए और शाम के सत्र में भाग लेने के लिए पहुंच गए.
इसी सम्मेलन के उस दृश्य को कौन भूल सकता है जब फ़िदेल कास्त्रो ने विज्ञान भवन के मंच पर ही सरेआम इंदिरा गाँधी को गले लगा लिया था. मशहूर पत्रकार सईद नक़वी कहते हैं, "इंदिरा गांधी को फ़िदेल ने छाती से लगा लिया. वो लजाई शर्माई दुल्हन बन गईं बिल्कुल. उनकी समझ में ही नहीं आया कि क्या करें. लेकिन वो इंदिरा को नेहरू की बेटी के रूप में देखते थे."
सईद नक़वी को 1990 में फ़िदेल कास्त्रो से इंटरव्यू करने का मौका मिला था. नक़वी याद करते हैं, "बड़ी मुश्किल से इंटरव्यू देने के लिए वो राज़ी हुए. हम क्यूबा पहुंचे. वहाँ पर हमेशा संस्पेंस रहता है. वो आपको कमरे में बैठा लेते हैं और फिर कहते हैं कि आप बाहर नहीं जा सकते हैं क्योंकि फ़िदेल के दफ़्तर से किसी समय भी फ़ोन आ सकता है. फिर मुझसे रात में तैयार रहने के लिए कहा गया. मैं समझा कि शरीफ़ आदमी छह या सात या बहुत हुआ आठ बजे बुलाएगा."
नक़वी आगे बताते हैं, "लेकिन उन्होंने मुझे रात दस बजे बुलाया. उनकी गाड़ी आई मुझे लेने. वहां भी एक साइड रूम में हम बैठे. घंटे भर बाद कास्त्रो प्रकट हुए. मैं समझा कि वो मुझे सिगार पेश करेंगे. लेकिन पता चला कि उन्होंने सिगार पीना छोड़ दिया था. उन्होंने एक ब्रांडी अपने लिए बनाई और एक मेरे लिए. वो ग़ोया इसके ज़रिए मुझसे रैपो कायम करने की कोशिश कर रहे थे. डेढ़ घंटे शुरुआती बातचीत में ही लग गए. उन्होंने मुझे ताड़ लिया और मैंने भी उनको नाप लिया."
"हमारी जो दुभाषिया थी, वो साहब जादूगरनी थी. ये बिल्कुल एहसास नहीं होता था कि वो हमारी बातचीत का अनुवाद कर रही हैं. ग़ालिब का मिसरा है... मैंने जाना कि ग़ोया ये भी मेरे दिल में है... उस पर पूरी तरह लागू होता था. कास्त्रो ने बोला, और क्विक फ़ायर अनुवाद हुआ... बिना किसी ग़ल्ती के. फ़िदेल अंग्रेज़ी के कुछ शब्द समझते थे लेकिन जवाब हमेशा क्यूबाई स्पेनिश में देते थे. फ़िदेल के साथ ये नहीं था कि आप पंद्रह बीस मिनट में इंटरव्यू ख़त्म कर दें. आप फंसे तो फिर फंसे. उनसे कोई गुफ़्तगू तीन चार घंटे से कम नहीं हो सकती."